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Mumbai Assembly Demands Culpable Homicide Case After Sakinaka Manhole Death Sparks Outrage


Mumbai Assembly Demands Culpable Homicide Case After Sakinaka Manhole Death Sparks Outrage

मुंबई के साकीनाका इलाके में खुले मैनहोल में गिरकर एक बुजुर्ग की मौत के बाद महाराष्ट्र विधानसभा में आज इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। बारिश के बीच चल रहे ड्रेनेज मरम्मत कार्य के दौरान हुई इस दर्दनाक घटना ने BMC की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक की पहचान 60 वर्षीय असलम इसाक शेख के रूप में हुई है, जो साकीनाका के यादव नगर के निवासी थे। बताया जा रहा है कि खैरानी रोड पर ड्रेनेज मरम्मत के लिए मैनहोल का ढक्कन हटाया गया था, लेकिन मौके पर पर्याप्त सुरक्षा बैरिकेड्स, चेतावनी संकेत या अन्य जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे।

प्राथमिक जानकारी के मुताबिक असलम शेख सड़क किनारे चलते हुए मोबाइल पर बात कर रहे थे, तभी अचानक खुले मैनहोल में गिर गए और तेज बहाव में बह गए। मौके पर मौजूद ठेका मजदूरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में मुंबई फायर ब्रिगेड की कई घंटों की खोजबीन के बाद उनका शव नाले से बरामद किया गया।

इस घटना को लेकर विधानसभा में बीजेपी विधायक और मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमीत साटम तथा विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सिर्फ निलंबन को नाकाफी बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज करने की मांग की।

वहीं कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने BMC पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार तीन दिनों में तीन बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन अब भी सबक लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले एक व्यक्ति मैनहोल में गिरा, फिर स्कूल बस हादसे में एक बच्चा शिकार हुआ और अब एक और जान चली गई।

घटना के बाद BMC ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। साथ ही संबंधित ठेकेदार के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या मरम्मत स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

इस हादसे ने एक बार फिर मुंबई में मानसून के दौरान नागरिक सुरक्षा और BMC के मरम्मत कार्यों की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि इस मामले में सिर्फ निलंबन तक कार्रवाई सीमित रहती है या वाकई जिम्मेदारों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है।

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