Should India Have Regional Benches of the Supreme Court?
भारत में सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठों की ज़रूरत पर विचार - विश्लेषण इरफान मछीवाला द्वारा
वर्तमान में भारत का सर्वोच्च न्यायालय केवल नई दिल्ली में स्थित है जिससे तमिलनाडु केरल पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर जैसे दूरदराज़ राज्यों के नागरिकों के लिए वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल और खर्चीला साबित होता है
देश भर के लोगों के लिए न्याय सुलभ और समान रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में क्षेत्रीय पीठों की स्थापना एक अहम कदम साबित हो सकता है यह नागरिकों को न्याय पाने का अधिकार सशक्त रूप से सुनिश्चित करेगा
सुप्रीम कोर्ट पर इस समय सत्तर हजार से अधिक मामले लंबित हैं जो कि 2024 के आंकड़ों के अनुसार एक बड़ा बोझ है क्षेत्रीय पीठें इन मामलों को क्षेत्रीय स्तर पर निपटाने में मदद कर सकती हैं जिससे न्याय वितरण की प्रक्रिया तेज हो सकेगी
दूरदराज़ क्षेत्रों से दिल्ली आने वाले वादियों और वकीलों के लिए यात्रा और रहने का खर्च काफी अधिक होता है क्षेत्रीय पीठें इन खर्चों को कम कर आम लोगों के लिए न्याय की राह आसान बनाएंगी
यदि मुकदमे वहीं पर सुने जाएं जहां से उनका मूल है तो आने जाने और समय तालमेल में लगने वाला समय बचेगा इससे मुकदमों का निपटारा जल्दी हो सकेगा
उच्च न्यायालयों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट तक अपील पहुंचाने में देरी होती है क्षेत्रीय पीठों से अपीलें समय पर दाखिल की जा सकेंगी जिससे उच्च न्यायालयों का बोझ घटेगा
विश्व के कई बड़े लोकतंत्र जैसे यूनाइटेड किंगडम अमेरिका और कनाडा में शीर्ष न्यायालयों की बहु पीठ या सर्किट कोर्ट प्रणाली लागू है ब्रिटेन में सुप्रीम कोर्ट अलग अलग क्षेत्रों में बैठकें करता है जबकि अमेरिका में विभिन्न सर्किट कोर्ट के माध्यम से सर्वोच्च न्याय का संचालन होता है
भारत में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए राजनीतिक और न्यायिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होगी
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