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Rafiq Shaikh Questions BMC Budget, Raises Ground Reality Concerns in Civic House Speech

Rafiq Shaikh Questions BMC Budget, Raises Ground Reality Concerns in Civic House Speech

मुंबई महानगरपालिका में 21 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में वार्ड 48 मालवानी के नगरसेवक रफीक शेख ने बजट पर अपनी विस्तृत और तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह बजट एंबिशन, स्केल और इंटेंट तो दिखाता है, लेकिन प्रायोरिटीज, एग्जीक्यूशन और ग्राउंड लेवल इंपैक्ट को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम मुंबईकर केवल कागज़ी घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर वास्तविक बदलाव चाहता है, जिसमें साफ पानी, बेहतर सड़कें, कम ट्रैफिक, स्वच्छ वातावरण, अच्छी शिक्षा और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।

रफीक शेख ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में बीएमसी का बजट लगभग दोगुना हो गया है, लेकिन इसके बावजूद आम नागरिक की जीवन गुणवत्ता में वैसा सुधार दिखाई नहीं देता। उन्होंने सड़कों पर गड्ढे, हर साल होने वाली बाढ़, अस्थिर जल आपूर्ति और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को ग्राउंड रियलिटी बताते हुए सवाल उठाया कि बजट बढ़ने के बावजूद लोगों को राहत क्यों नहीं मिल रही।

स्वास्थ्य क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ के बजट के बावजूद अस्पतालों की स्थिति चिंताजनक है। अस्पतालों में भीड़, बेड की कमी, आउटडेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेशलाइज्ड सेवाओं की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिमी उपनगरों में बच्चों के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि गरीब परिवारों को मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।

मालवानी क्षेत्र की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां 70 प्रतिशत से अधिक आबादी स्लम में रहती है और कोई पूर्ण विकसित म्युनिसिपल अस्पताल नहीं है। उन्होंने जनवरी 2026 में हुए सिलेंडर ब्लास्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि समय पर उचित इलाज न मिलने और अस्पतालों के बीच शिफ्टिंग के कारण कई लोगों की जान चली गई, जो सिस्टम की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

उन्होंने केईएम ट्रेनिंग सेंटर को फुल-फ्लेज हॉस्पिटल में बदलने, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं शुरू करने और डायलिसिस सेंटर स्थापित करने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि कई जगह अस्पतालों के लिए जमीन आरक्षित होने के बावजूद नए अस्पताल नहीं बन रहे, जो बेहद चिंताजनक है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने कई खामियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि म्युनिसिपल स्कूलों में छात्रों की संख्या घट रही है, शिक्षकों की कमी है, डिजिटल सुविधाएं नहीं हैं और स्कूलों की हालत खराब है। विशेष बच्चों के लिए पर्याप्त स्कूल और संसाधन नहीं होने के कारण कई बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, स्किल डेवलपमेंट और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग की।

सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर उन्होंने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कों को बार-बार खोदा जा रहा है, विभागों में समन्वय की कमी है और अधूरे प्रोजेक्ट्स लोगों के लिए परेशानी बन रहे हैं। उन्होंने ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने और थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की।

जल विभाग पर बोलते हुए उन्होंने पानी के प्रदूषण और पुरानी पाइपलाइनों को बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि पाइपलाइन फटने और अवैध कनेक्शन के कारण लोगों तक दूषित पानी पहुंच रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने पुरानी पाइपलाइनों के ऑडिट और रिप्लेसमेंट की मांग की।

ड्रेनेज सिस्टम को लेकर उन्होंने बताया कि कई जगह माइनर नालों का कनेक्शन मेजर ड्रेनेज से नहीं है, जिससे पानी सीधे खुले क्षेत्रों और मैंग्रोव में जा रहा है। इससे जलभराव, पर्यावरण नुकसान और स्वास्थ्य संकट की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने मानसून से पहले तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।

उन्होंने पीसीओ और एसडब्ल्यूएम विभाग में स्टाफ की भारी कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि इसकी वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने तत्काल भर्ती और कॉन्ट्रैक्ट प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।

ड्रग्स के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल कानून व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य का भी बड़ा मुद्दा है। उन्होंने गरीब परिवारों के लिए सरकारी रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करने की मांग की।

उन्होंने सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा, गार्डन और प्लेग्राउंड में सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने पर भी जोर दिया। साथ ही नगर निगम के राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स सुधार, डिजिटल सर्वे, लीजिंग और सोलर एनर्जी जैसे सुझाव दिए।

अपने संबोधन के अंत में रफीक शेख ने कहा कि मुंबई केवल इंफ्रास्ट्रक्चर की नहीं बल्कि लोगों की शहर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट का असली असर तभी माना जाएगा जब हर वार्ड, खासकर स्लम क्षेत्रों में, जमीन पर बदलाव दिखाई देगा। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ 25 लाख का फंड देकर जनप्रतिनिधियों से विकास की उम्मीद करना अव्यावहारिक है और इसे पुनर्विचार की जरूरत है।

उन्होंने अपने भाषण का समापन इस बात के साथ किया कि अगर स्वास्थ्य, सड़क, पानी और ड्रेनेज सिस्टम मजबूत नहीं होंगे तो पूरा शहर प्रभावित होगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि यह बजट सिर्फ दस्तावेज न बनकर वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बने और हर नागरिक तक इसका लाभ पहुंचे।

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