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AIKC’s Byculla Hospital Plan Faces Waqf Tribunal Challenge Over Property Status; Hearing on October 5


AIKC’s Byculla Hospital Plan Faces Waqf Tribunal Challenge Over Property Status; Hearing on October 5

मुंबई: ऑल इंडिया खिलाफत कमेटी (AIKC) द्वारा अपने ऐतिहासिक भायखला परिसर में मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने की योजना के बीच महाराष्ट्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने कमेटी को 5 अक्टूबर को पेश होने के लिए समन जारी किया है। यह मामला कमेटी की संपत्ति के वक्फ दर्जे को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है।

यह समन मुंबई के दो निवासियों द्वारा दायर मुकदमे के बाद जारी किया गया है। याचिका में AIKC के इस दावे को चुनौती दी गई है कि उसकी संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं है।

AIKC ने इससे पहले महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ वक्फ के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। कमेटी का कहना था कि वह एक पब्लिक ट्रस्ट है और सिविल कोर्ट द्वारा मंजूर स्कीम के तहत संचालित होती है। कमेटी ने जिला वक्फ अधिकारी को दिए जवाब में UMEED Act की धारा 61 के तहत जारी नोटिस को गैर-कानूनी और मनमाना बताते हुए उसे तुरंत वापस लेने की मांग की थी।

वहीं, मुकदमे में दावा किया गया है कि AIKC UMEED Act के तहत मुस्लिम धार्मिक एंडोमेंट के रूप में पंजीकृत है और ऐसी संपत्तियों के हस्तांतरण तथा बिना अनुमति विकास पर कानून के तहत रोक है।

जमाअ मस्जिद के पूर्व ट्रस्टी शुऐब खतीब सहित कुछ कम्युनिटी नेताओं ने मैनेजमेंट पर एंडोमेंट की संपत्ति को निजी प्रोजेक्ट की ओर मोड़ने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मुस्लिम ट्रस्टों की फाइलें वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर की गई थीं।

AIKC के चेयरमैन सरफराज अरज़ू ने वक्फ के तौर पर वर्गीकरण के दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि संगठन इंग्लिश कॉमन लॉ के तहत पब्लिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत था।

अरज़ू के मुताबिक, “फाइलें बिना नोटिस के ट्रांसफर की गई थीं। कई ट्रस्टों ने 2003 में इस ट्रांसफर को चुनौती दी थी और मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है।”

AIKC ने पहले के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वैध वक्फ के लिए संपत्ति का टाइटल अल्लाह के नाम पर होना जरूरी है। कमेटी ने मई 1964 के बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट के एक डिक्री का भी हवाला दिया, जिसमें एक स्कीम तय की गई थी और जिसके तहत संपत्तियां भगवान के नाम पर नहीं, बल्कि ट्रस्टियों के पास निहित थीं। AIKC का कहना है कि इसी आधार पर संगठन को वक्फ के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।

कमेटी ने आधिकारिक वक्फ सूची में अपना नाम शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया है। AIKC का दावा है कि सर्वे कमिश्नर ने वक्फ अधिनियम की धारा 4 के तहत जरूरी नोटिस जारी नहीं किया और अनिवार्य जांच भी नहीं की, जिसके कारण संबंधित अधिसूचना को कमेटी ने अमान्य बताया है।

अलग से, ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि मझगांव स्थित उसकी 1,408.31 वर्ग मीटर जमीन राज्य सरकार की लीजहोल्ड जमीन है। सरफराज अरज़ू के अनुसार, “लीज पर मिली जमीन पर वक्फ एंडोमेंट नहीं हो सकता, क्योंकि वक्फ हमेशा के लिए कायम किया जाता है।”

अरज़ू ने बताया कि ट्रस्ट ने हाल ही में सरकार से लीज का नवीनीकरण कराया है और इसी के आधार पर म्युनिसिपल अप्रूवल की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसके लिए 4 मई 2023 को महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से रजिस्टर्ड लीज डीड भी निष्पादित की गई थी।

अब इस संपत्ति के वक्फ दर्जे और AIKC के दावों से जुड़े विवाद पर महाराष्ट्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल में 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

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