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Malvani Mumbai Public: Parents Raise Serious Questions Over Education & Basic Facilities


Malvani Mumbai Public: Parents Raise Serious Questions Over Education & Basic Facilities

मालवणी के मुंबई पब्लिक स्कूल में शिक्षा व्यवस्था पर अभिभावकों के गंभीर सवाल


दिनांक 18 अगस्त 2026 को अभिभावकों की शिकायत मिलने के बाद हमारी टीम मुंबई पब्लिक स्कूल, मालवणी गेट नंबर 7 पहुंची। यहां महिला कांग्रेस कार्यकर्ता और कुछ अभिभावकों ने स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने रखीं।

अभिभावकों के अनुसार, उर्दू माध्यम में तीसरी कक्षा पास करने वाली एक छात्रा को चौथी कक्षा में मराठी माध्यम में दाखिला दिलाने का प्रयास किया गया। छात्रा को मराठी भाषा के शुरुआती अक्षरों की पहचान और पढ़ने में कठिनाई होने के कारण उसे तीसरी कक्षा में ही रखने की बात सामने आई।

यह मामला कई सवाल खड़े करता है। यदि कोई बच्चा तीसरी कक्षा पास कर चुका है, तो क्या उसे बुनियादी अक्षरों की पहचान और पढ़ने में इतनी कठिनाई क्यों हो रही है? क्या स्कूल में बच्चों की पढ़ाई और उनकी बुनियादी शैक्षणिक क्षमता पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है?

अभिभावकों ने शिक्षकों की उपस्थिति और पढ़ाने के तरीके को लेकर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि कुछ शिक्षक कक्षा में पढ़ाई के बजाय मोबाइल फोन पर अधिक समय बिताते हैं और शिक्षकों की अनुपस्थिति भी रहती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस मामले में हमने मराठी माध्यम की प्रिंसिपल से बात की। उनका कहना था कि छात्रा को उर्दू माध्यम में ही रहना चाहिए, जहां उसे मराठी भी सिखाई जाती है। इसके बाद उर्दू माध्यम के प्रिंसिपल से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन हमें बताया गया कि वे शाम 4 बजे आएंगे। कुछ समय इंतजार करने के बाद हमारी टीम वहां से रवाना हो गई।

अभिभावकों ने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें कीं। उनका आरोप है कि स्कूल के बाथरूम की साफ-सफाई उचित नहीं है और पानी की भी समस्या है। इसके अलावा, कई वर्षों से बच्चों के टूटे हुए बेंच पर बैठने की शिकायत भी सामने आई है। अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों को घर जाने के बाद शारीरिक परेशानी होती है।

अभिभावकों की एक और शिकायत है कि मुंबई पब्लिक स्कूल के परिसर में कई आवारा कुत्ते मौजूद रहते हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल परिसर में कुत्तों की मौजूदगी के कारण बच्चों में डर का माहौल बना रहता है। उनका सवाल है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल परिसर को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और इस समस्या का उचित समाधान करने के लिए जिम्मेदार प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

एक अन्य गंभीर शिकायत यह है कि स्कूल खुले हुए लगभग दो महीने हो चुके हैं, लेकिन कुछ बच्चों को अभी तक पाठ्यपुस्तकें और नोटबुक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पर्याप्त अध्ययन सामग्री के बिना बच्चे अपनी पढ़ाई कैसे आगे बढ़ाएंगे?

ये शिकायतें केवल एक स्कूल तक सीमित सवाल नहीं हैं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, पढ़ाई की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा की जरूरत को सामने लाती हैं।

गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना उनका अधिकार है। सवाल यह है कि यदि सरकारी स्कूलों में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर ऐसी शिकायतें लगातार सामने आती रहेंगी, तो अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए कैसे आश्वस्त होंगे?

हम इस मामले को आगे भी उठाएंगे और स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षकों तथा अभिभावकों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास करेंगे। साथ ही, संबंधित प्रशासन के सामने भी इन शिकायतों को रखने की कोशिश की जाएगी।

अगर आपका बच्चा मुंबई पब्लिक स्कूल या किसी अन्य सरकारी स्कूल में पढ़ता है, तो इस पूरी रिपोर्ट को देखने के बाद आपकी क्या राय है? क्या आपके क्षेत्र के स्कूल में भी शिक्षा, शिक्षक, पानी, बाथरूम, बेंच या किताबों से जुड़ी ऐसी समस्याएं हैं? अपनी राय और सुझाव हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को बदनाम करना नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य से जुड़े सवालों को सामने लाना है।

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