Mahim Social Worker Irfan Machiwala Urges Governments to Avoid Mass Exam Cancellations Over Paper Leaks
Mahim Social Worker Irfan Machiwala Urges Governments to Avoid Mass Exam Cancellations Over Paper Leaks
मुंबई: माहिम के सामाजिक कार्यकर्ता इरफान मचिवाला ने केंद्र सरकार और देशभर की राज्य सरकारों से अपील की है कि SSC, HSC, स्नातक, स्नातकोत्तर या व्यावसायिक परीक्षाओं में पेपर लीक की घटना सामने आने पर पूरी परीक्षा रद्द करने या सभी छात्रों के परिणाम रोकने का फैसला तुरंत न लिया जाए।
मचिवाला ने कहा कि जिन छात्रों ने ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की और पेपर लीक से उनका कोई संबंध नहीं था, उन्हें कुछ लोगों की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर पेपर लीक होता है तो सरकार को सबसे पहले यह जांच करनी चाहिए कि लीक हुआ पेपर कितने बड़े स्तर पर प्रसारित हुआ और वास्तव में किन लोगों ने उसे हासिल किया या उसका इस्तेमाल किया। इसके बाद ही परीक्षा रद्द करने या अन्य कार्रवाई पर फैसला होना चाहिए।”
ईमानदार छात्रों को न मिले सजा
मचिवाला ने कहा कि पेपर लीक होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि परीक्षा में शामिल सभी छात्रों को लीक हुए पेपर का फायदा मिला हो। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि पहले लीक की वास्तविक पहुंच और प्रभाव की जांच की जाए तथा उन छात्रों और अन्य लोगों की पहचान की जाए, जिन्होंने वास्तव में लीक हुए पेपर को हासिल किया या उसका इस्तेमाल किया।
उनके अनुसार, बिना यह निर्धारित किए कि परीक्षा में कितने बड़े स्तर पर अनियमितता हुई है, पूरी परीक्षा रद्द करना हजारों या लाखों ईमानदार छात्रों के लिए सामूहिक सजा के समान हो सकता है।
दोबारा परीक्षा कराने पर बढ़ता है आर्थिक और प्रशासनिक बोझ
मचिवाला ने यह भी कहा कि पूरी परीक्षा दोबारा आयोजित करना सरकार और परीक्षा प्राधिकरणों पर भारी आर्थिक एवं प्रशासनिक बोझ डालता है।
नई प्रश्नपत्र प्रणाली तैयार करना, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, सुरक्षा इंतजाम, परिवहन, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि यदि लक्षित जांच और उचित कार्रवाई के जरिए पेपर लीक की समस्या का समाधान किया जा सकता है, तो पूरी परीक्षा दोबारा आयोजित करने पर होने वाले अनावश्यक खर्च से बचना चाहिए।
छात्रों के शैक्षणिक और पेशेवर भविष्य पर असर
मचिवाला ने कहा कि परीक्षा रद्द होने या परिणाम रोक दिए जाने से छात्रों के शैक्षणिक और पेशेवर करियर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
परिणाम में देरी से कॉलेज में दाखिला, विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई, रोजगार के अवसर, प्रोफेशनल लाइसेंस और आगे होने वाली परीक्षाओं पर असर पड़ सकता है। SSC, HSC और व्यावसायिक परीक्षाओं के छात्रों के लिए यह देरी विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि इन परीक्षाओं के परिणाम अक्सर उनकी अगली शिक्षा या करियर के अगले चरण से जुड़े होते हैं।
दोषियों की पहचान हो, सभी छात्रों को दंडित न किया जाए
मचिवाला ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्राधिकरणों को आधुनिक जांच तकनीकों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि पेपर लीक से अनुचित लाभ उठाने वाले लोगों की पहचान की जा सके।
उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड, उत्तर पुस्तिकाओं के पैटर्न, संचार रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करके संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में भी मदद मिल सकती है कि किसी व्यक्तिगत छात्र या संगठित समूह ने पेपर लीक का फायदा उठाया था या नहीं।
मचिवाला ने कहा कि जो लोग नकल करने या पेपर लीक से अनुचित लाभ उठाने के दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ लागू नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, जिन छात्रों की पेपर लीक में कोई भूमिका नहीं रही है और जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी है, उनके परिणामों को बरकरार रखा जाना चाहिए।
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