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Malad’s Kharodi Gaothan Residents Oppose SRA Biometric Survey, Say “We Are Not Slum Dwellers”


Malad’s Kharodi Gaothan Residents Oppose SRA Biometric Survey, Say “We Are Not Slum Dwellers”
मालाड के खारोड़ी गांव में SRA बायोमेट्रिक सर्वे का विरोध, रहवासियों ने कहा—हम झुग्गीवासी नहीं, पुश्तैनी घरों के मालिक हैं

मुंबई: मालाड पश्चिम के खारोड़ी गांव में स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) द्वारा बायोमेट्रिक सर्वे के लिए जारी नोटिसों का रहवासियों ने विरोध किया है। प्रस्तावित स्लम क्लस्टर PN-019 में इलाके को शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। रहवासियों का कहना है कि खारोड़ी एक पुराना गांव है, जहां परिवार कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनके अपने घरों के भूखंड हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा, “हम झुग्गीवासी नहीं हैं, हम इस जमीन के मूल निवासी हैं।”

शुक्रवार सुबह लगाए गए सर्वे के नोटिस

23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार की सुबह खारोड़ी गांव के कई स्थानों पर SRA की ओर से नोटिस लगाए गए। इन नोटिसों में इलाके को स्लम क्लस्टर में शामिल करने की प्रस्तावित प्रक्रिया के तहत बायोमेट्रिक सर्वे की जानकारी दी गई थी।

स्थानीय निवासी एंथनी ग्रेशियस ने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से इस इलाके में रह रहा है। उनके अनुसार, मई 2022 में भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए थे। उस समय रहवासियों ने स्थानीय विधायक असलम शेख से संपर्क किया था, जिसके बाद उन्होंने मुंबई उपनगरीय जिलाधिकारी के साथ बैठक की व्यवस्था की थी।

एंथनी ग्रेशियस ने कहा कि खारोड़ी एक पुराना गांव है और यहां रहने वाले लोग अपने घरों के भूखंडों के मालिक हैं। उन्होंने खुद को इलाके का मूल निवासी बताते हुए कहा कि उन्हें झुग्गीवासी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

वॉचडॉग फाउंडेशन ने अधिकारियों से मांगा जवाब

इस मामले में वॉचडॉग फाउंडेशन ने शुक्रवार को संबंधित सरकारी अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखते हुए एक प्रतिनिधित्व सौंपा। संस्था के अनुसार, कई वर्षों के अंतराल के बाद नए नोटिस जारी होने से स्थानीय निवासियों और संपत्ति धारकों के बीच चिंता बढ़ गई है।

फाउंडेशन ने कहा कि खारोड़ी गांव एक पुरानी बस्ती है, जहां लोगों के लंबे समय से आवासीय, सामाजिक और सामुदायिक संबंध हैं। इलाके को स्लम क्लस्टर में शामिल करने और उसके बाद पुनर्विकास योजना लागू करने से लोगों के घरों, अधिकारों, पात्रता और पूरे इलाके के भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।

संस्था ने मांग की है कि प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति, वर्ष 2022 में जारी नोटिसों पर हुई कार्रवाई और अब दोबारा प्रक्रिया शुरू करने के कानूनी एवं प्रशासनिक आधार को स्पष्ट किया जाए।

पुराने गांवों को स्लम घोषित करने पर उठ रहे सवाल

मुंबई के शहरी विस्तार से पहले से मौजूद पारंपरिक गांवों, जिन्हें गांवठान (Gaothan) कहा जाता है, के निवासी लंबे समय से उन्हें स्लम की श्रेणी में रखे जाने पर सवाल उठाते रहे हैं।

रहवासियों की चिंता है कि स्लम पुनर्विकास योजना के तहत कई कमरों और मंजिलों वाले मौजूदा घरों के बदले उन्हें SRA के तहत मिलने वाले फ्लैट दिए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनके वर्तमान घरों की तुलना में मिलने वाले आवास का आकार और स्वरूप अलग हो सकता है।

इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी योजना को लागू करने से पहले इलाके की वास्तविक स्थिति, पुराने आवासीय अधिकारों और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।

मुंबई के 189 गांवठानों में से केवल 52 की मैपिंग का दावा

वॉचडॉग फाउंडेशन के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने गांवठानों और कोलीवाड़ों की सीमाएं निर्धारित करने के लिए डेवलपमेंट प्लान पर उनकी मैपिंग की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि इन पारंपरिक बस्तियों को स्लम क्षेत्रों से अलग पहचाना जा सके।

फाउंडेशन का दावा है कि मुंबई के कुल 189 गांवठानों में से केवल 52 की मैपिंग की गई है, जबकि शेष 137 गांवठानों की सीमाएं अब भी स्पष्ट नहीं हैं।

संस्था के मुताबिक, सीमाओं की स्पष्ट पहचान नहीं होने से अतिक्रमण, अनियोजित विकास, नागरिक सुविधाओं की कमी और स्थानीय निवासियों, बिल्डरों तथा सरकारी अधिकारियों के बीच विवाद जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

SRA और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की मांग

वॉचडॉग फाउंडेशन के ट्रस्टी गॉडफ्रे पिमेंटा ने कहा कि रहवासी इस प्रस्ताव की स्थिति, वर्ष 2022 में जारी नोटिसों पर हुई कार्रवाई और पूरी प्रक्रिया के कानूनी एवं प्रशासनिक आधार को लेकर स्पष्ट जानकारी चाहते हैं।

फाउंडेशन ने संबंधित अधिकारियों से निम्नलिखित मांगें की हैं:

• प्रस्ताव से जुड़े सभी संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।

• स्थानीय रहवासियों को अपनी आपत्तियां और शिकायतें दर्ज कराने का उचित अवसर दिया जाए।

• SRA और अन्य संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की जाए।

• रहवासियों की शिकायतों और आपत्तियों पर विचार किए जाने तक ऐसी कोई कार्रवाई न की जाए, जिसे बाद में वापस लेना संभव न हो।

फिलहाल, खारोड़ी गांव में प्रस्तावित SRA बायोमेट्रिक सर्वे को लेकर रहवासियों की आपत्तियां और उनकी मांगें सामने आई हैं। इस मामले में प्रस्ताव की स्थिति, पुराने नोटिसों पर हुई कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष पर स्पष्टता का इंतजार है।

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