पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में क्या था एजी पेरारिवलन उर्फ अरिवु का रोल। पहले फांसी फिर उम्रकैद और अब रिहाई। फांसी के तख्ते तक पहुंचकर लौट आया
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई 1991 को हत्या हुई थी। 31 साल जेल में बिताने के बाद पेरारिवलन ने खुली हवा में सांस ली।
2018 में प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल ने राज्यपाल को सिफारिश दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 18 मई 2022 को संविधान के अनुच्छेद article 142 का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन को रिहा कर दिया।
तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई 1991 को चुनावी रैली में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के वक्त एजी पेरारिवलन उर्फ अरिवु की उम्र 19 साल थी। पुलिस ने उसे राजीव की हत्या में इस्तेमाल होने वाले बम बनाने के लिए दो बैटरी देने और इस साजिश के लिए गलत पते से मोटरसाइकिल खरीदवाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने तमिल कवि कुयिलदासन के बेटे पेरारिवलन समेत 26 लोगों को मौत की सजा सुनाई।
पेरारिवलन की सजा को बाद में उम्रकैद में बदला गया और बुधवार को जब वह रिहा हुआ तो उसकी उम्र 50 साल थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसे रिहा करने के फैसले में जिन बिंदुओं को मुख्य आधार बनाया, उनमें गवर्नर के रवैये और दया याचिका को लंबे समय तक लंबित रखने पर
राज्यपाल और राष्ट्रपति ने फाईल पर कोई फैसला नहीं लिया इसलिये अदालत को मजबूरन उसकी रिहाई करनी पड़ी
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